આર્ટીકલ

6/recent/ticker-posts

"यहूदी क्यों हैं दुनिया की सबसे कामयाब कौम: तीन उसूल जिन्होंने दुनिया को बदल दिया"

 

"यहूदी क्यों हैं दुनिया की सबसे कामयाब कौम: तीन उसूल जिन्होंने दुनिया को बदल दिया"

    यहूदी इतने अमीर क्यों हैं? गजा में लाखों बेगुनाह बच्चे औरतें, बूढ़े शहीद हो रहे हैं। लबनान तबाह हो रहा है। शाम टूट चुका है। मगर पूरी दुनिया खामोश क्यों है? अकवामे मुत्तहदा अमेरिका, यूरोप सभी इन्हीं के साथ खड़े क्यों हैं? अरब मालिक खामोश क्यों हैं? क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सिर्फ 0.2% फीसद आबादी ने कैसे पूरी दुनिया को गुलाम बना रखा है? कैसे एक छोटी सी रियासत इसराइल ने पूरी इस्लामी दुनिया को घुटनों पर ला खड़ा कर दिया। कैसे 1 करोड़ 58 लाख यहूदियों ने 1 अरब 80 करोड़ मुसलमानों को बेबस कर दिया। यह कोई साजिश नहीं बल्कि ठोस हकीकत है। दुनिया के अमीर तरीन लोगों में इनका गलबा है, गूगल, फेसबुक, बड़े बैंक, हॉलीवुड, मीडिया सब इनके कब्जे में हैं। वो दुनिया को कंट्रोल करते हैं और हम सिर्फ देखते रहते हैं।  

   लेकिन सबसे कड़वी हकीकत यह है कि इनकी कामयाबी के तीन राज हमारी इस्लामी तालीमात से लिए गए हैं जिन्हें हमने छोड़ दिया और उन्होंने अपनाया। आज हम आपको वो तीन उसूल बताएंगे जिनसे हम दोबारा उठ सकते हैं।  

    बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। 

अस्सलामुअलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू। 

      प्यारे दोस्तों, यहूदी दुनिया की कुल आबादी का सिर्फ 0.2% प्रतिशत होने के बावजूद यहूदी कौम किस तरह पूरी दुनिया की मशात, सियासत और जराए अबलाक पर मुकम्मल तसल्लुत हासिल किए हुए है। एक छोटी सी रियासत बनाकर उन्होंने पूरी इस्लामी दुनिया को झुका दिया और सवाल यह है कि हम मुसलमान इससे क्या सबक ले सकते हैं।  

    1948 में फलीस्तीन की सरज़मीन पर इसराइल का क़ायम होना सिर्फ एक सियासी वाक़या नहीं बल्कि यहूदी कौम की सदियों की मंसूबाबंदी का नतीजा था। सदियों की मेहनत, तजुर्बा और इल्म ने उन्हें यह मुकाम दिलाया।  

    आज इसराइल की यहूदियों की आबादी तो 95 लाख है लेकिन यह मुल्क आज दुनिया की 25वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है। आईबीएम, गूगल, सिस्को, फेसबुक, मोटरोला जैसी कंपनियों के तहकीकी मराकिज़ इसराइल में हैं।  

आज इसराइल में 42 अरबपति मौजूद हैं, यानी हर 10 लाख में 6.7 अरबपति। दुनिया की 0.2% आबादी के पास नोबेल इनाम का 22% हिस्सा है। हार्वर्ड, Stanford, oxford , cambridge जैसी यूनिवर्सिटियों में यहूदी तलबा और असातिज़ा की तादाद बेहद ज़्यादा है। यहूदियों की कामयाबी के पीछे तीन बुनियादी उसूल हैं — इल्म, तिज़ारत और इत्तेहाद।  

पहला उसूल है इल्म।

    यहूदी बच्चे तीन साल की उम्र से पढ़ना शुरू करते हैं, घरों में किताबें होती हैं, वालिदैन रोज़ बच्चों को किताबें पढ़कर सुनाते हैं। सवाल करना उनकी रिवायत का हिस्सा है। तलबा को बचपन से ही इल्म की कदर सिखाई जाती है।  माता-पिता रोज़ बच्चों को पढ़कर सुनाते हैं और उन्हें सवाल पूछने की आदत डालते हैं। तौरेत  जैसी धार्मिक पुस्तकों में ज्ञान और प्रश्न का महत्व बार-बार बताया गया है।

यहूदी कहते हैं — “इल्म में की गई निवेश सबसे बेहतरीन व्यापार है।” वे रिटायर्ड होने के बाद बुढ़ापे में भी नई भाषाएं, नए कोर्स और हुनर सीखते रहते हैं। ज्ञान उनके जीवन का स्थायी हिस्सा है। इसके विपरीत, मुस्लिम समाज में पढ़ाई को अक्सर मजहबी पढ़ाई तक सीमित कर दिया गया है। Drop out रेशियों बड़ा है। बहुत कम तादाद डिग्री तक पहुंचती है। कुरान भी हम सवाब की नियत से बीना समझे पढ़ते हैं 

दूसरा उसूल है तिज़ारत।

 पांच या छह साल के बच्चे नींबू पानी का स्टॉल लगाकर कारोबार की बुनियाद समझ लेते हैं। कारोबार में मिले पैसे को निवेश करते हैं। उन्हें सिखाया जाता है कि दूसरों के लिए काम मत करो, खुद मालिक बनो। यही सोच उन्हें उद्यमी बनाती है। अब हमारी हालत देखिए अपने बच्चोंको बचपन से ही नौकरी के लिए तैयार करते हैं।

इस्लामी इतिहास भी यही बताता है — पैगंबर मुहम्मद स.अ.व. स्वयं व्यापारी थे, और उनके कई सहाबा भी कामयाब ताजिर थे। कुरान में तिजारत को हलाल कहा गया है, लेकिन आज कई मुस्लिम समाजों में व्यापार को कमतर समझा जाता है। यह सोच बदलने की जरूरत है।

तीसरा उसूल है इत्तहाद: भाईचारा और सहयोग

—यहूदियों की तीसरी ताक़त है उनका सामाजिक एकजुटपन। भाईचारा और यकजहती। दुनिया में कहीं भी यहूदी रहें, एक-दूसरे की मदद करते हैं। ब्याज रहित क़र्ज़ देते हैं, व्यापार में सहयोग करते हैं। यूनिवर्सिटियों में साबिक़ तलबा के नेटवर्क एक-दूसरे को रोज़गार और नौकरी दिलाने  में मदद करते है।   उनकी सामाजिक संस्थाएं पूरी दुनिया में फैली हुई हैं यहूदियों को हर तरह की मदद करती है।

इसके बरअक्स, मुसलमान कौम शिया-सुन्नी, बरेलवी-देवबंदी जैसे फिरकों में बट चुकी है। हम एक-दूसरे से हसद करते हैं एक दूसरे को सच्चा मुसलमान, जन्नती और जहन्नामी का सर्टिफिकेट बांटते जा रहे हे । जबकि कुरान कहता है कि अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ो और फिरको में न बटो।  लेकिन जब से मुसलमानो ने तक्सीम करो हुकूमत करो की पॉलिसी अपनाई तब से मुसलमान फिरको में और गुटों में बट गए। यहूदियों ने ऐसी पॉलिसी बनाई  की हमारे रहबरों ने ही हमें एजुकेशन से दूर रखा  ताकि हम होशियार बनकर यहूदियों की बराबरीमें न आए। 

इतिहास से सबक

इतिहास गवाह है जब मुसलमानों ने ज्ञान, व्यापार और एकता को अपनाया था,  जब मुसलमान इन्हीं उसूलों पर अमल करते थे तो अब्बासी और उस्मानी सल्तनतें मज़बूत थीं। परंतु जब हमने इन उसूलों से दूरी बनाई, तब ग़ुलामी और पतन हमारी तकदीर बन गए।

नोबेल इनामात और अरबपतियों के आंकड़े दिखाते हैं कि यहूदी अपनी काबिलियत, समझदारी और मेहनत  से आगे हैं, जबकि मुसलमानों के पास सब कुछ होते हुए भी ग़फलत में हैं।  

आज की जरूरत

फिर से सफलता हासिल करने के लिए मुसलमानों को वही रास्ता अपनाना होगा — इल्म में निवेश, तिजारत को इज्जत, और उम्मत में इत्तहाद। घरों में किताबों का माहौल बनाना, बच्चों को सवाल करने देना, आर्थिक शिक्षा देना और समाज में भाईचारा बढ़ाना ही बदलाव की शुरुआत है। हमें फिर से इल्म को अहमियत देनी होगी, बच्चों को पढ़ाई, तफ़सीर और इल्म हासिल करने की प्रेरणा देनी होगी। कारोबार को इज्जत देनी होगी और भाईचारे को अमल में लाना होगा।  फिरकों से ऊपर उठें और एक उम्मत की तरह इत्तेहाद कायम करें।  

सामाजिक हुकूमतों को भी तालीमी निज़ाम में तब्दीली, कारोबार को निसाब में शामिल करने, तहक़ीक़ और टेक्नोलॉजी पर सरमायाकारी बढ़ाने की ज़रूरत है।  

मुशरका मुआशी ताक़त और दिफाई इत्तहाद बनाना होगा ताकि दुनिया में मुसलमानों की इज़्ज़त और ताक़त बहाल हो सके।  

मगर कामयाबी का मतलब सिर्फ दौलत नहीं, बल्कि ऐसी हलाल सफलता जो अल्लाह की रज़ा के मुताबिक हो और आखिरत में भी काम आए।  

मुसलमान अहद करें कि इल्म हासिल करेंगे, बच्चों को कारोबार सिखाएंगे, फिरका-वारियत से ऊपर उठकर एक-दूसरे का साथ देंगे, और इस्लामी तालीमात पर अमल करेंगे।  

याद रखें, हर बड़ा सफर एक छोटे कदम से शुरू होता है। यहूदियों की सफलता कोई जादू नहीं बल्कि इल्म, तिज़ारत और इत्तेहाद पर अमल का नतीजा है। अगर मुसलमान आज से यह उसूल अपनाएं तो दोबारा दुनिया की कायद कौम बन सकते हैं।  

अल्लाह ताला हमें इल्म, अमल, तिज़ारत और इत्तेहाद की राह पर चलने की तौफीक़ अता करे। 

इसराइल अरोडिया  - 9427646283


Post a Comment

0 Comments